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दिल्ली में सर्दियों की प्रदूषण पाबंदियां शुरू: 500 पंपों पर बिना पीयूसी ईंधन नहीं, 1 नवंबर से बाहर की नॉन-बीएस-VI गाड़ियों पर रोक

दिल्ली के पेट्रोल पंपों ने 1 अक्टूबर से बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाली गाड़ियों को ईंधन देना बंद कर दिया। 1 नवंबर से शहर के बाहर पंजीकृत नॉन-बीएस-VI गाड़ियों का प्रवेश रोका जाएगा, और निर्माण, दफ़्तरों में उपस्थिति और पार्किंग पर पाबंदियां आएंगी।

मध्य दिल्ली की दफ़्तरी इमारतों के ऊपर धुंधला नारंगी सूरज और आसमान में स्मॉग
नई दिल्ली के कनॉट प्लेस के ऊपर स्मॉग। (फ़ाइल फ़ोटो) फ़ोटो: wili hybrid / Wikimedia Commons (CC BY 2.0)

नई दिल्ली: दिल्ली भर के पेट्रोल पंपों ने गुरुवार, 1 अक्टूबर से बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) वाली गाड़ियों को ईंधन देना बंद कर दिया। वायु प्रदूषण के ख़िलाफ़ शहर की सर्दियों की योजना के जो उपाय सबसे पहले लागू हुए, यह उनमें से एक है।

यह नियम शहर के उन 500 पेट्रोल पंपों पर लागू है, जहां ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगे हैं। द न्यूज़मिल के अनुसार कैमरे गाड़ी का पंजीकरण नंबर पढ़कर उसे राष्ट्रीय डेटाबेस से मिलाते हैं, और अगर प्रमाणपत्र की मियाद ख़त्म हो चुकी है या वह है ही नहीं, तो पंप पेट्रोल, डीज़ल, सीएनजी या एलपीजी नहीं देता। ईंधन ख़रीदने से पहले मालिकों को प्रमाणपत्र नया कराना होगा; भाग लेने वाले पंपों पर जांच की सुविधा है।

बिज़नेस टुडे के अनुसार यह नियम वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के 15 मई 2026 को जारी निर्देश संख्या 101 के तहत है, जिसमें पेट्रोल और सीएनजी स्टेशनों से 1 अक्टूबर से बिना वैध प्रमाणपत्र वाली गाड़ियों में ईंधन न भरने को कहा गया है। राजेश वर्मा की अध्यक्षता वाली सीएक्यूएम की एक उप-समिति ने 29 सितंबर को अपनी 26वीं बैठक में तैयारियों की समीक्षा की। यह क़दम सर्दियों की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें पुरानी गाड़ियों, पराली जलाने और औद्योगिक उत्सर्जन पर भी कार्रवाई शामिल है।

भारत पेट्रोलियम के मैनेजर दिनेश कुमार ने द न्यूज़मिल से कहा, "आज सुबह से हम किसी भी ऐसी गाड़ी को ईंधन नहीं दे रहे हैं, जिसके पास प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं है।" ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर जय भगवान गौतम ने कहा, "हम इसका पूरा स्वागत करते हैं।"

सर्दियों की योजना

न्यूज़ग्राम के अनुसार दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने 28 सितंबर को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में यह योजना घोषित की। इससे पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में चर्चा हुई थी। इसकी ज़्यादातर पाबंदियां 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेंगी:

  • गाड़ियां: दिल्ली के बाहर पंजीकृत नॉन-बीएस-VI गाड़ियों का 1 नवंबर से शहर में प्रवेश रोका जाएगा। पुरानी हो चुकी गाड़ियों, यानी 15 साल से पुरानी पेट्रोल और 10 साल से पुरानी डीज़ल गाड़ियों, पर सख़्ती होगी, और तीन ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों पर 2.5 लाख गाड़ियों की फ़िटनेस जांच की योजना है।
  • दफ़्तर: न्यूज़ग्राम के अनुसार सरकारी और निजी दफ़्तरों के 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम करेंगे। आवाजाही को बांटने के लिए नगर निगम के दफ़्तर सुबह 8.30 से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के दफ़्तर सुबह 10 से शाम 6.30 बजे तक खुलेंगे।
  • निर्माण: 1 नवंबर से 31 जनवरी तक तोड़फोड़ और खुले में सिविल निर्माण पर रोक रहेगी।
  • पार्किंग: अधिकृत पार्किंग स्थलों पर फ़ीस दोगुनी होगी, दिल्ली मेट्रो के स्थलों को छोड़कर।
  • बसें: न्यूज़ग्राम के अनुसार 150 इलेक्ट्रिक बसें जोड़ी जा रही हैं, जिससे बेड़ा 700 से ज़्यादा का हो जाएगा।

अक्टूबर भर जागरूकता अभियान चलेगा और नवंबर में पीयूसी केंद्रों को उन्नत किया जाएगा। योजना में प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट की हर हफ़्ते जांच, नागरिकों के लिए शिकायत व्यवस्था, रोज़ाना वायु गुणवत्ता बुलेटिन और पड़ोसी एनसीआर राज्यों से तालमेल भी शामिल है।

जहां रिपोर्टें अलग हैं

चैनल आईएएम ने 7 अक्टूबर की रिपोर्ट में घर से काम के नियम को दफ़्तरों के कुछ कर्मचारियों पर लागू बताया, और कहा कि 1 नवंबर से खुले में निर्माण और धूल पैदा करने वाली तोड़फोड़ पर पाबंदी रहेगी, जबकि 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ पर पूरी रोक होगी। उसने खुले में कचरा जलाने के ख़िलाफ़ तेज़ कार्रवाई और प्रदूषण के स्रोतों की तुरंत पहचान के लिए एआई आधारित कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम का भी ज़िक्र किया।

डाउन टू अर्थ ने 5 अक्टूबर को बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) में भी बदलाव किया है, जिससे बसों पर कुछ पाबंदियां पहले चरण में ही लागू होंगी। सर्दियों की योजना ग्रैप के अतिरिक्त है, जिसके तहत हवा की गुणवत्ता तय सीमा पार करने पर और पाबंदियां लगती रहेंगी।

अब तक हवा का हाल

चैनल आईएएम के मुताबिक़ 4 अक्टूबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 187 था। सितंबर का औसत 102 रहा, जो पांच साल में सितंबर का सबसे कम औसत है। शहर में प्रदूषण आम तौर पर नवंबर से जनवरी के बीच चरम पर होता है।

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