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यमन सरकार ने हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ "ऑपरेशन डॉन ऑफ़ यमन" छेड़ा, सऊदी वायुसेना का साथ

यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने सऊदी वायुसेना की मदद से हूतियों के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान छेड़ा है और लाल सागर तट पर बढ़त का दावा किया है। सऊदी अरब ने रियाद पर मिसाइल और ड्रोन हमले के हूती दावे को ख़ारिज किया।

रेगिस्तानी हवाई पट्टी से उड़ान भरता रॉयल सऊदी एयर फ़ोर्स का एफ़-15 लड़ाकू विमान
उड़ान भरता रॉयल सऊदी एयर फ़ोर्स का एफ़-15 ईगल। (फ़ाइल फ़ोटो, अमेरिकी वायुसेना) फ़ोटो: Tech. Sgt. Hans H. Deffner / Wikimedia Commons (Public domain)

अदन: यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने हूती आंदोलन के ख़िलाफ़ बड़ा सैन्य अभियान छेड़ा है, जिसमें सऊदी अरब की वायुसेना भारी मदद दे रही है। हूती 2014 से राजधानी सना पर क़ाबिज़ हैं। ऑल इंडिया रेडियो ने 6 अक्टूबर को यह जानकारी दी।

राष्ट्रपति रशद अल-अलीमी ने कहा कि "ऑपरेशन डॉन ऑफ़ यमन" नाम के इस अभियान का मक़सद हूतियों के क़ब्ज़े वाले इलाक़े वापस लेना और राज्य का अधिकार बहाल करना है। सरकारी बलों का दावा है कि उन्होंने लाल सागर के दक्षिणी मुहाने पर स्थित बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य और ज़ुबाब इलाक़े के आसपास बढ़त बनाई है, और बंदरगाह शहर मोखा को फिर से अपने क़ब्ज़े में ले लिया है।

गठबंधन के आंकड़े

सरकार और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अभियान के शुरुआती दिनों के बड़े आंकड़े जारी किए हैं। ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक़, उनका कहना है कि सादा, अल जौफ़, ताइज़ और पश्चिमी तट पर हूती ठिकानों के ख़िलाफ़ 1,122 सटीक कार्रवाइयां की गईं, सोमवार के अभियान में 100 सऊदी लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया, और 324 "उच्च महत्व" के ठिकाने नष्ट किए गए। इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी।

कर्नल माजिद अब्दुल्ला अल-नुज़ैली ने कहा कि कार्रवाइयों में "तोपख़ाने और रॉकेट लॉन्चर के ठिकानों, रक्षात्मक मोर्चाबंदी, आपूर्ति मार्गों, अतिरिक्त टुकड़ियों और कमान व नियंत्रण केंद्रों" को निशाना बनाया गया।

यह अभियान कई दिनों से बढ़ती लड़ाई के बाद आया है। यूएनआई के मुताबिक़, 2 अक्टूबर को यमन की सेना ने तीन घंटे के भीतर ताइज़ प्रांत में हूती ठिकानों पर 20 हवाई हमले किए। एक सैन्य प्रवक्ता ने कहा, "हमलों में दुश्मन के ठिकानों पर सीधी चोट हुई और मिलिशिया के लड़ाकों, उपकरणों और सैन्य गतिविधियों को नुक़सान पहुंचा।"

4 अक्टूबर को अदन की सबा समाचार एजेंसी ने कहा कि सरकारी बलों ने तूर अल-बाहा और ताइज़ मोर्चों पर हूती टुकड़ियों के ख़िलाफ़ 97 कार्रवाइयां कीं, जिनमें 260 हूती लड़ाके मारे गए या निष्क्रिय किए गए और 44 सैन्य वाहन नष्ट या बेकार हुए। सना और सादा में हूती ठिकानों पर भी हमले किए गए।

लड़ाई फिर कैसे भड़की

अदन स्थित साउथ24 सेंटर ने सितंबर में बताया कि अक्टूबर 2022 से काफ़ी हद तक कायम संघर्ष-विराम किसी राजनीतिक समझौते के बिना ख़त्म हो गया। तनाव जुलाई में सना हवाई अड्डे पर ईरानी उड़ानों को लेकर शुरू हुआ, जिनकी लैंडिंग रोकने के लिए रनवे पर हमला किया गया; अगस्त में हूतियों ने मारिब और हद्रमौत में सैन्य ठिकानों पर हमले किए, मोखा को निशाना बनाया और सऊदी जहाज़ों के ख़िलाफ़ "नाकेबंदी के बदले नाकेबंदी" का एलान किया।

साउथ24 के मुताबिक़, 3 सितंबर को पश्चिमी ताइज़ और दक्षिणी होदेदा में हूतियों के बड़े हमले के बाद कई प्रांतों में जवाबी कार्रवाइयां शुरू हुईं, जो संघर्ष-विराम के बाद की सबसे गंभीर लड़ाई है। सऊदी अरब के मुताबिक़, दक्षिणी सऊदी अरब पर हूती हमलों में 73 नागरिक घायल हुए, और सऊदी विदेश मंत्री ने कहा कि हूतियों ने "ऐसा दरवाज़ा खोल दिया है जिसे वे संभाल नहीं सकते।"

रियाद पर हमले का दावा, और खंडन

हूतियों का कहना है कि उन्होंने सऊदी अरब पर जवाबी हमला किया। उनके सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने हूती चैनल अल मसीरा से कहा कि उन्होंने "रियाद में अरामको को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन अभियान चलाया", और दावा किया कि हमले "निशाने पर लगे और आग लगी।"

ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक़, गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने इस दावे को "भ्रामक" बताया और कहा कि ताइज़ में भारी नुक़सान झेल रहे हूती एक "काल्पनिक जीत" गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।

सऊदी अरब के सहयोगियों की बैठक

ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक़, यह लड़ाई सऊदी अरब के नए रक्षा साझेदारों को भी खींच लाई है। पाकिस्तान और तुर्किये ने मक्का रक्षा गठबंधन की आपात बैठक में हिस्सा लिया और सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को लागू करने पर सहमति जताई।

यूएनआई के मुताबिक़, 2 अक्टूबर को पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक़ डार ने एलान किया कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये रियाद में गठबंधन की रणनीतिक राजनीतिक रक्षा समिति की बैठक करेंगे, जिसका फ़ोकस सऊदी अरब पर बढ़ते हूती हमले होंगे।

यमन से आगे इसकी अहमियत

बाब अल-मंदब दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है, और तट पर लड़ाई इस जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले यातायात को ख़तरे में डालती है। जलडमरूमध्य और मोखा के आसपास सरकार की दावा की गई बढ़त अगर टिकी रही, तो हूती उस तट से पीछे हटेंगे। यूएनआई ने लड़ाई की अपनी रिपोर्टों में बताया कि हूतियों को ईरान का समर्थन हासिल है।

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